<?xml version='1.0' encoding='UTF-8'?><?xml-stylesheet href="http://www.blogger.com/styles/atom.css" type="text/css"?><feed xmlns='http://www.w3.org/2005/Atom' xmlns:openSearch='http://a9.com/-/spec/opensearchrss/1.0/' xmlns:georss='http://www.georss.org/georss' xmlns:gd='http://schemas.google.com/g/2005' xmlns:thr='http://purl.org/syndication/thread/1.0'><id>tag:blogger.com,1999:blog-4822776080128065965</id><updated>2011-09-01T00:06:39.831-07:00</updated><category term='EVENING'/><title type='text'>दैनंदिनी</title><subtitle type='html'>Daily diary of Surendra Singh Sisodia, Sheoganj.....</subtitle><link rel='http://schemas.google.com/g/2005#feed' type='application/atom+xml' href='http://dayandnights.blogspot.com/feeds/posts/default'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4822776080128065965/posts/default?max-results=100'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://dayandnights.blogspot.com/'/><link rel='hub' href='http://pubsubhubbub.appspot.com/'/><author><name>Surendra</name><uri>http://www.blogger.com/profile/01448311128190551263</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://4.bp.blogspot.com/_nPm61siB87o/SnaAR7pAJjI/AAAAAAAAASY/0EvE4Yq3n3U/S220/my.JPG'/></author><generator version='7.00' uri='http://www.blogger.com'>Blogger</generator><openSearch:totalResults>8</openSearch:totalResults><openSearch:startIndex>1</openSearch:startIndex><openSearch:itemsPerPage>100</openSearch:itemsPerPage><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4822776080128065965.post-2283307119740168122</id><published>2010-02-03T01:40:00.000-08:00</published><updated>2010-02-03T01:45:05.364-08:00</updated><title type='text'>जानवरों की सभा - मुहावरों में फजीहत</title><content type='html'>जानवरों ने अपने बूढे शेर की अध्यक्षता में साधारण सभा में इन्सानों द्वारा जानवरों की मुहावरों और कहावतों में मिट्टीपलीद करने का मुद्दा उठाया । सबसे अधिक प्रताडित लगने वाला गधा आगे आया और बोला-मुझे इन्साफ चाहिये । इन्सानों ने मुझे मुर्खों के समकक्ष रखकर मेरी तौहिन करने में कोई कसर नहीं छोडी । जब भी मुर्खों का जिक्र होता हैं गधा शब्द का संबोधन किया जाता हैं । निरा गधा, वैशाखनन्दन वगैराह कहकर मेरी इन्सल्ट की जाती हैं ।&amp;nbsp;क्या कभी किसी इन्सान ने किसी गधे का आईक्यू टेस्ट लिया जो वो हमें मूर्ख ठहरा रहे हैं । मैं अपनी मस्ती में मस्त रहता हूँ तो मुझे वैशाखनन्दन कहा जाता हैं । अब हमसे यह अपमान सहन नहीं होता । गधों के प्रतिनिधिमण्डल ने जोर-जोर से रेंगना शुरू कर दिया । गधों के प्रतिनिधि ने कहा- अध्यक्ष महोदय, हमारे रेंगने को लेकर भी इन्सानों ने मजाक बना दिया हैं । उनके किसी इन्सान द्वारा बेसुरा गाने पर कहते हैं कि गधा रेंग रहा हैं । अब बताईये कुदरत द्वारा दी गई आवाज को लेकर किसी का मजाक उडाना कहां तक सही हैं । अध्यक्ष ने धीरे से सर हिलाया और कहा-नेक्स्ट । &lt;br /&gt;उल्लू उडकर नजदीक आया और बोला । सरकार मेरी भी इन्सानों ने गिनती बुद्धु और बेवकूफी की हैं । उल्लू बनाना यानि बेवकूफ बनाना । बताईये मैंने कभी बेवकूफी की हैं? &lt;br /&gt;अध्यक्ष ने कहा-नेक्स्ट । अगली बारी में कुत्ता आया और बोला-सर, मुझे इन्सान वफादार जानवर कहते हैं । पर जब किसी को गाली देते हैं तो कहते हैं - कुत्ते, कमीने । मुझे कमीनेपन के बराबरी में क्यों डाला जाता हैं? &lt;br /&gt;अगली बारी में लोमडी ने कहा- हुजूर मुझे चालाक कहा जाता हैं । हुजूर ये हमारा हुनर हैं कि हम अपने झुंड के साथ रणनीति के साथ शिकार करते हैं और वो भी पेट की खातिर । कभी आपने देखा हैं कि हमने किसी हिरण को मारकर उसका सर अपने गुफा की दीवार पर लटकाया हो । &lt;br /&gt;अगले नम्बर पर गाय आई और बोली - मुझे इन्सानों ने माता का दर्जा दिया हैं । मेरे नाम पर चंदा वसूला जाता है । लाखों और करोडों रूपये की संपदा जोडी जाती हैं । ट्रस्ट और गौशालायें खोली जाती हैं लेकिन हमें खाने के लिये पॉलिथीन की थैलियां ढूंढनी पडती हैं । &lt;br /&gt;बिल्ली ने कहा- सर, मेरे बारे में कहते हैं -सौ सौ चूहें खाकर बिल्ली हज को चली । सर, मैं या मेरे पूर्वज कभी हज को नहीं गये । चूहें खाना हमारी मजबूरी हैं । इन्सान हमें पालते भी इसीलिये हैं । फिर ये हम तो अपने पेट के लिये करते हैं लेकिन वो हमसे इन्हें मरवाकर खुद को पवित्र मानते हैं । चूहों ने कहा- हम तो अपने पेट भरने जितना खाते हैं । लेकिन इन इन्सानों में जो खाद्य निगम के अधिकारी हैं वो&amp;nbsp;अनाज के गोदामों में घपला करते हैं और इल्जाम हमारे उपर डाल देते हैं । इन्सान हमें मारने के लिये जहरीली दवाओं के साथ आक्रमण कर देते हैं । &lt;br /&gt;इसी प्रकार कुछ अन्य जानवरों की दलीलें सुनने के बाद अध्यक्ष बने शेर ने लंबी हूंकार भरी और अपनी स्पीच शुरू की- मुझे यह कहते हुए अफसोस हैं कि आप लोग अपनी तुलना किये जाने से आहत हैं । प्रकृति ने सभी को कुछ कमजोरी और कुछ विशेषताएं दी हैं । किसी भी जीव को सर्वगुणसम्पन्न नहीं बनाया । इन्सान दूसरों के गुण और अवगुण देखकर तुलनात्मक बातें करता हैं । इन्सान जानवरों के साथ खुद की तुलना खुद से भी करता हैं । इसलिये यह कहना गलत हैं कि उन्होंने जानवरों को ही मुहावरों में उपयोग किया हैं । इन्सानों में हर तरह की विशेषताएं होती हैं । किसी को घोडा, किसी को गधा, उल्लू, शेर, चूहा, लोमडी, गीदड, सियार, पोपट इत्यादि जानवरों से खुद की तुलना करता हैं । तुलना से इन्सान जानवर नहीं बनता और न ही जानवर इन्सान । इन्सानों में ही स्वार्थ, चालाकी, धूर्तता, कायरता, बहादुरी, बेवकूफी, समझदारी आदि सभी लक्षणों के नमूने मिल जाते हैं । लेकिन फिर भी इन्सानों को उपर्युक्त जानवरों में से प्रत्येक में केवल एक ही कमी दिखती हैं जिसको उन्होंने अपने एक गुण दर्शाने के लिये प्रतीकात्मक रूप से इस्तेमाल किया हैं । इसलिये इसमें शर्म या खेद की कोई बात नहीं हैं । प्रकृति की इस कृति और जानवर में केवल एक ही गुण का अन्तर हैं और वो हैं इन्सानियत । इन्सानियत ही जानवर और इन्सान में विभेद करती हैं । जब तक इन्सानियत जीवित रहेगी , पृथ्वी पर जीवन बचा रहेगा । इसलिये आज इस सभा के अन्त में हम सभी मिलकर प्रार्थना करें कि इन्सानियत को बचाये रखे । &lt;br /&gt;सभा समाप्त हुई ।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4822776080128065965-2283307119740168122?l=dayandnights.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://dayandnights.blogspot.com/feeds/2283307119740168122/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://dayandnights.blogspot.com/2010/02/blog-post.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4822776080128065965/posts/default/2283307119740168122'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4822776080128065965/posts/default/2283307119740168122'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://dayandnights.blogspot.com/2010/02/blog-post.html' title='जानवरों की सभा - मुहावरों में फजीहत'/><author><name>Surendra</name><uri>http://www.blogger.com/profile/01448311128190551263</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://4.bp.blogspot.com/_nPm61siB87o/SnaAR7pAJjI/AAAAAAAAASY/0EvE4Yq3n3U/S220/my.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4822776080128065965.post-9087583535214038680</id><published>2010-01-31T23:08:00.000-08:00</published><updated>2010-01-31T23:08:02.493-08:00</updated><title type='text'>My Name is William Shakespeare</title><content type='html'>&lt;span style="font-size: large;"&gt;मशहूर लेखक और कवि विलियम शेक्सपीयर ने कहा था- What is in the name.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;एक बार की बात हैं शेक्सपीयर होम लोन अप्लाय करने के लिये बैंक में गये । वहां मैनेजर से जाकर अपना परिचय देते हुए आने का कारण बताया । मैनेजर ने कहा कि आपको अपने लोन के लिये आईडी प्रूफ और एड्रेस प्रूफ देना पडेगा । शेक्सपीयर ने पूछा-क्यों? मैनेजर ने कहां-ये साबित करने के लिये कि आप विलियम शेक्सपीयर ही हैं । शेक्सपीयर ने कहा - इसमें साबित करने की बात कैसे आई । मुझसे आप रोमियो जुलियट, मेक्बेथ या ओथेलो के बारे में पूछ लिजीये । मैनेजर ने कहां - सर हमें इनके बारे में पता नहीं हैं तो पूछेंगे क्या? आप प्रूफ ले आओ । शेक्सपीयर बोले- सर, किस तरह के प्रूफ से काम चल जायेगा? मैनेजर&amp;nbsp; - राशनकार्ड, ड्राईविंग लाईसेन्स, पैन कार्ड, पासपोर्ट ईत्यादि । &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;शेक्सपीयर ने अपना इरादा बदल दिया और सोचा किसी और देश में जाकर बस जाते हैं । एयरपोर्ट पर जाकर टिकट लेने के लिये इन्क्वायरी की तो बताया पासपोर्ट और वीजा लगेगा&amp;nbsp;। शेक्सपीयर ने पूछा इनके बगैर नहीं चलेगा? ऑफिसर ने बताया - सर इनके बगैर आप आदमी ही नहीं हैं तो फिर आपको माइग्रेशन की परमिशन नहीं मिल सकती । ये प्रूव करना पडेगा कि आप ही विलियम शेक्सपीयर हैं । &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;शेक्सपीयर अपने घर वापस आ गये । और सोचने लगे मुझे ये साबित करना पड रहा हैं कि मैं ही विलियम शेक्सपीयर हूँ । शेक्सपीयर को तब समझ में आया कि तंत्र में रहने के लिये नाम भी होना चाहिये और उसे प्रूव करने वाले दस्तावेज भी । &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;अब शेक्सपीयर नहीं कहेगे कि :"What is in the name.&lt;/span&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4822776080128065965-9087583535214038680?l=dayandnights.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://dayandnights.blogspot.com/feeds/9087583535214038680/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://dayandnights.blogspot.com/2010/01/my-name-is-william-shakespeare.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4822776080128065965/posts/default/9087583535214038680'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4822776080128065965/posts/default/9087583535214038680'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://dayandnights.blogspot.com/2010/01/my-name-is-william-shakespeare.html' title='My Name is William Shakespeare'/><author><name>Surendra</name><uri>http://www.blogger.com/profile/01448311128190551263</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://4.bp.blogspot.com/_nPm61siB87o/SnaAR7pAJjI/AAAAAAAAASY/0EvE4Yq3n3U/S220/my.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4822776080128065965.post-5030770724648387928</id><published>2010-01-29T01:10:00.000-08:00</published><updated>2010-01-29T02:00:02.589-08:00</updated><title type='text'>माया ही माया</title><content type='html'>&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_nPm61siB87o/S2Kl73ISEsI/AAAAAAAAArs/gBNAXc72nO4/s1600-h/M_Id_110400_Mayawati.jpg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" kt="true" src="http://2.bp.blogspot.com/_nPm61siB87o/S2Kl73ISEsI/AAAAAAAAArs/gBNAXc72nO4/s320/M_Id_110400_Mayawati.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;span style="background-color: white; font-size: large;"&gt;उत्तर प्रदेश में मायावती सरकार ने विधानसभा में मायावती सरकार द्वारा बनाये गये स्मारकों एवं मूर्तियों की सुरक्षा के लिये पुलिस बल लगाये जाने सम्बन्धी बिल पेश किया हैं । इस पर प्रबुद्ध न्यूज चैनलों द्वारा बहस छेडी गई । मायावती सरकार के रवैये को सभी बुद्धिजीवी तानाशाही कहते हैं । मायावती ने अपने प्रदेश में मूर्तियों और स्मारकों के निर्माण पर हजारों करोड रूपये खर्च किये हैं । इस पर मायावती ने देश, विपक्ष और कोर्ट की खरी खोटी भी सुनी हैं । लेकिन बहनजी सतत अपने लक्ष्य की और अग्रसर हैं ।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;आप&amp;nbsp; सोच रहे होंगे कि मुझे मायावती के इस कदम में कौनसा लक्ष्य दिखाई पडा हैं । जनाब आप इतिहास की किताबें खोल कर देखिये, आपको&amp;nbsp;मिस्र की सभ्यता या सिन्धु घाटी की सभ्यता में उन लोगों के ही नाम पता चलेंगे जिन्होंने अपने लिये स्मारक बनवाये थे । अपने देश में आने वाले विदेशी पर्यटक भी स्मारकों, किलों, महलों को ही देखते हैं न कि अन्य जगहों को । यह तो बहनजी की दूरदर्शिता हैं कि वो अभी से स्मारकों और मूर्तियों पर पैसे खर्च करके खुद को इतिहास में जिन्दा रखना चाहती हैं । मान लिजिये यदि अपनी सभ्यता किसी प्राकृतिक आपदा से लुप्त हो जाये तो आने वाली नयी सभ्यताएं जब खुदाई करके इन स्मारकों को निकालेगी तो बहनजी का इतिहास जीवित हो उठेगा । गौरतलब हैं कि कागजों में दबा इतिहास तो समय के साथ मिट्टी में मिल जायेगा परन्तु पत्थरों पर उकेरा गया अमर हो जायेगा । &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;दूसरा मुद्दा यह था कि यह जनता का पैसा बर्बाद किया जा रहा हैं । यदि मेरी राय पूछी जाये तो इसमें भी बहनजी की दूरदर्शिता ही तो हैं । यदि शाहजहां ने इसी तरह की सोच रखकर ताजमहल नहीं बनवाया होता तो आज भारत को विदेशी पर्यटक कैसे मिलते? आज ताजमहल की वजह से आगरा और उत्तरप्रदेश को विश्व में पहचान मिली हैं और साथ ही लाखों लोगों को रोजगार भी । यानि फसल बोई शाहजहां ने और काट हम लोग रहे हैं । जिस प्रदेश में स्मारकों का विश्व सम्राट मौजूद हो वहां की दूरदर्शी मुख्यमंत्री को अपने स्मारक बनाने के विचार कैसे नहीं आयेगे ।&lt;/span&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4822776080128065965-5030770724648387928?l=dayandnights.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://dayandnights.blogspot.com/feeds/5030770724648387928/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://dayandnights.blogspot.com/2010/01/blog-post_29.html#comment-form' title='7 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4822776080128065965/posts/default/5030770724648387928'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4822776080128065965/posts/default/5030770724648387928'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://dayandnights.blogspot.com/2010/01/blog-post_29.html' title='माया ही माया'/><author><name>Surendra</name><uri>http://www.blogger.com/profile/01448311128190551263</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://4.bp.blogspot.com/_nPm61siB87o/SnaAR7pAJjI/AAAAAAAAASY/0EvE4Yq3n3U/S220/my.JPG'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/_nPm61siB87o/S2Kl73ISEsI/AAAAAAAAArs/gBNAXc72nO4/s72-c/M_Id_110400_Mayawati.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>7</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4822776080128065965.post-5703864469093037045</id><published>2010-01-28T03:08:00.000-08:00</published><updated>2010-01-28T03:08:01.060-08:00</updated><title type='text'>रिपब्लिक................</title><content type='html'>&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_nPm61siB87o/S2Fv8suu0oI/AAAAAAAAArk/XhwW-slWohY/s1600-h/91282922_d3a3f53825.jpg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" mt="true" src="http://4.bp.blogspot.com/_nPm61siB87o/S2Fv8suu0oI/AAAAAAAAArk/XhwW-slWohY/s320/91282922_d3a3f53825.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी २६ जनवरी को मेरी आंख पडोस की स्कूल में चल रहे देशभक्ति के गीतों से खुल गई । यह क्रम हर वर्ष १५ अगस्त और २६ जनवरी को सतत चलता रहता हैं । लताजी "ए मेरे वतन के लोगों" गाती हैं तो महेन्द्र कपूर "मेरे देश की धरती सोना उगले" का राप अलापते हैं । लेकिन मेरा ध्यान खींचा मुकेश के&amp;nbsp;"होठों पे सच्चाई रहती हैं"&amp;nbsp;गाने ने । कितनी सच्चाई से यह गीत लिखा, गाया और फिल्माया गया था । शायद उस दौर में सच्चाई रही होगी और लोगों को यह गीत अपना लगा होगा । अब तो सौ में से अस्सी बेईमान के संवाद पर तालियं पडती हैं और यह भी भूल जाते हैं कि यह संवाद अपने पर&amp;nbsp;भी तो लागू होता हैं । &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;जब हम बेईमानी और भ्रष्टाचार को मिटाने की बात करते हैं तो खुद को उसमें शामिल नहीं करते । शायद बेईमानी और भ्रष्टाचार मिटाने की शुरूआत खुद से और परिवार से करनी चाहिये । आम आदमी राजनीति और कर्मचारियों के भ्रष्ट होनी की बात करते हैं तो कर्मचारी अधिकारियों और नेताओं के भ्रष्ट होने की बात करते हैं । अधिकारी व्यापारियों की तो व्यापारी हर आदमी के भ्रष्ट आचरण की बात करता हैं । यानि कोई दूध का धुला नहीं हैं । &lt;br /&gt;इस कुंए में ही भांग पडी हैं तो क्या कर सकते हैं । आम आदमी भी गाहे बगाहे अपने आचरण को भ्रष्ट कर ही लेता हैं । कभी टेक्स चुराकर तो की बिजली चुराकर, कभी बिना टिकट सफर करके तो कभी किसी प्रकार की सरकारी योजना के लिये खुद को गरीब ठहराकर । हम सभी अपने अपने कद और हैसियत के अनुसार भ्रष्ट आचरण करते हैं और इस फिराक में रहते हैं कि कोई बडा हाथ मारने का चान्स मिल जाये । हमने ही तो अपने स्वार्थ के लिये कर्मचारियों और अधिकारियों को रिश्वत लेना सिखाया । हमने ही नेताओं से अपने काम निकालने के लिये कमीशन या अन्य प्रलोभन दिया । बिना काबिलियत के भी नौकरी पाने की लालच में मंत्रियों और अधिकारीगण को सिफारिश करवाई या अनियमितताओं वाले काम निकालने के लिये अधिकारियों को गिफ्ट पकडाये । &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;व्यापारी वर्ग भी मिलावट करना, मुनाफाखोरी, जमाखोरी, कम तोलना, घटिया किस्म के माल बेचना ईत्यादि भ्रष्ट आचरण वाले काम करते हैं साथ ही टेक्स चोरी करने के लिये बिल नहीं बनाने जैसे काम भी करते हैं । शायद हम भी उनसे बिल नहीं मांगकर उनकी चोरी में हिस्सेदार बन जाते हैं । बस या रेल्वे में बिना टिकट यात्रा करना या बच्चों की उम्र कम बताकर टिकट में रियायत लेना, बिजली के मीटर से छेडछाड करना इत्यादि प्रत्यक्ष भ्रष्ट आचरण भी आम आदमी ही करता हैं । रेल्वे और बसों की जर्जर अवस्था के साथ-साथ रेल्वे स्टेशन और बस स्टेशनों पर अव्यवस्थाओं के लिये भी हम ही जिम्मेदार हैं । लेकिन इसके लिये भी हम व्यवस्था को जिम्मेदार मानते हैं । शायद ही कोई मंत्री बस में सफर करता हो और अपनी सीट को फाडने का प्रयास करता हो । सार्वजनिक सम्पत्तियों पर अतिक्रमण कर हम ही सरकार को चूना लगाते हैं । सडक पर आम आदमी ही अपनी पीक थूकता हैं और सार्वजनिक उद्यानों के पौधे हम ही नष्ट करते हैं । &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;इस वर्ष हमने अपना ६१ वां गणतन्त्र दिवस मनाया । यानि हमने गणतन्त्र के ६० वर्ष पूरे कर लिये । सरकारी सेवा में ६० वर्ष की उम्र अधिवार्षिकी आयु यानि सेवानिवृति की आयु मानी जाती हैं । मेरे कहने का तात्पर्य यह कदापि नहीं हैं कि हमें गणतन्त्र को रिटायर करना चाहिये । इस वर्ष हमें अपने अधिकारों के तन्त्र को रिटायर करना चाहिये और गणतन्त्र और देश के प्रति अपने कर्तव्यों को सिंहासन&amp;nbsp; पर बिठाना चाहिये । अब देश ने हमें क्या दिया के बजाय देश को हमने क्या दिया पर गौर करना चाहिये । गत ६० वर्षों में हमने गणतन्त्र द्वारा प्रदत्त अधिकारों के उत्सव मनाये हैं । हमने गणतन्त्र द्वारा मिले अधिकारों का भरपूर उपयोग व दुरूपयोग किया । लेकिन अब हमें अपने देश के प्रति कर्तव्यों के निर्वहन का संकल्प लेना चाहिये । &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;शायद इसी प्रकार हम लम्बे समय तक गणतन्त्र दिवस मनाने का सुख भोग सकेंगे । &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;जय हिन्द ।&lt;/span&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4822776080128065965-5703864469093037045?l=dayandnights.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://dayandnights.blogspot.com/feeds/5703864469093037045/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://dayandnights.blogspot.com/2010/01/blog-post.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4822776080128065965/posts/default/5703864469093037045'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4822776080128065965/posts/default/5703864469093037045'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://dayandnights.blogspot.com/2010/01/blog-post.html' title='रिपब्लिक................'/><author><name>Surendra</name><uri>http://www.blogger.com/profile/01448311128190551263</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://4.bp.blogspot.com/_nPm61siB87o/SnaAR7pAJjI/AAAAAAAAASY/0EvE4Yq3n3U/S220/my.JPG'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/_nPm61siB87o/S2Fv8suu0oI/AAAAAAAAArk/XhwW-slWohY/s72-c/91282922_d3a3f53825.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4822776080128065965.post-6691970682951275799</id><published>2009-12-09T01:20:00.000-08:00</published><updated>2010-01-22T03:24:28.838-08:00</updated><title type='text'>....ताकि अमर रहे वो आवाज ।</title><content type='html'>&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://4.bp.blogspot.com/_nPm61siB87o/Sx9sDfypj-I/AAAAAAAAArA/R0yPP97L_nU/s1600-h/original_img44ccb15176918.jpg"&gt;&lt;img style="TEXT-ALIGN: center; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 296px; DISPLAY: block; HEIGHT: 400px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5413164084451971042" border="0" alt="" src="http://4.bp.blogspot.com/_nPm61siB87o/Sx9sDfypj-I/AAAAAAAAArA/R0yPP97L_nU/s400/original_img44ccb15176918.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt; भारत में अगर किसी आवाज को महान कहा जाता हैं तो वो लताजी की आवाज हैं । देश के प्रथम प्रधानमंत्री श्री जवाहरलाल नेहरू को अपनी आवाज के दम पर रूलाने वाली लताजी ने फिल्म इण्डस्ट्री में पीढीयों के लिये गाया हैं । आज भी लोग उनकी आवाज के मुरीद हैं । नये हो या पुराने हर गाने में उनकी आवाज सिक्को की तरह खनकती हैं । &lt;/span&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;तकनीक की तरक्की के कारण आज घर-घर में सी.डी. और डी.वी.डी.की पहुंच हो गई हैं और साथ ही नये पुराने गाने लोग चाव से सुनते हैं । फिल्म इण्डस्ट्री में पीढियों के लिये गाने वाली पीढीयों के लिये गाती रहे ऐसी दुआऐं हमारी हैं । लेकिन कुदरत के कानून के आगे हम सब मजबूर हैं । लताजी ने शादी नहीं की इस कारण से उनकी संतति हमें देखने को नहीं मिलेगी । &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;हमने कई और महान गायकों को खोया हैं जिनकी क्षतिपूर्ति नहीं हो पाई । यदि हम किशोरकुमार या मुकेश की बात करें तो इनकी संतान भी गायकी के क्षैत्र में थे, पर वे अपने पिता की तरह उन ऊंचाईयों को नहीं छू पाये । परंपरागत शादी से उत्पन्न संतान में माता और पिता दोनों के गुण सम्मिलित होते हैं । यानि संतान के गुणसूत्र युग्म में एक सेट माता और एक सेट पिता के गुणसूत्र मिश्रित होकर जीनोम का निर्माण करते हैं । इस कारण से दोनों के गुण संतान में मिश्रित होकर प्रकट होते हैं । जिससे कई गुणों का ह्रास एवं नये गुणों का उद्भव होता हैं । &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;यह सत्यापित हैं कि परंपरागत तरीके से उत्पन्न संतान के गुणों में शुद्धता का ह्रास हो जाता हैं अतः किसी ऐसी तकनीक का उपयोग किया जाना चाहिये जिससे जीनोम की शुद्धता संतति में बनी रहे । &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;क्लोनिंग से पिता या माता की क्लोनिंग से उत्पन्न संतति में जीनोम की शुद्धता बनी रहती हैं । हालांकि विश्व के किसी भी देश ने क्लोनिंग को मान्यता नहीं दी हैं । लेकिन लताजी जैसी विलक्षण प्रतिभा के लिये हमें कानून से परे जाकर भी कदम उठाने चाहिये । हम लताजी को खोकर भी उन्हें जिन्दा रख सकें, इसके प्रयास किये जाने चाहिये । &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;शायद किसी दिन क्लोनिंग की तकनीक से हम मानव जाति की उन विलक्षण प्रतिभाओं को जीवित रख सकें जिसको खोने का ख्याल भी हमें परेशान कर देता हैं । लताजी अमर हैं और अमर रहे, एसी दुआऐं हमारी सदा उनके साथ हैं ।&lt;/span&gt; &lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4822776080128065965-6691970682951275799?l=dayandnights.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://dayandnights.blogspot.com/feeds/6691970682951275799/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://dayandnights.blogspot.com/2009/12/blog-post.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4822776080128065965/posts/default/6691970682951275799'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4822776080128065965/posts/default/6691970682951275799'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://dayandnights.blogspot.com/2009/12/blog-post.html' title='....ताकि अमर रहे वो आवाज ।'/><author><name>Surendra</name><uri>http://www.blogger.com/profile/01448311128190551263</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://4.bp.blogspot.com/_nPm61siB87o/SnaAR7pAJjI/AAAAAAAAASY/0EvE4Yq3n3U/S220/my.JPG'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/_nPm61siB87o/Sx9sDfypj-I/AAAAAAAAArA/R0yPP97L_nU/s72-c/original_img44ccb15176918.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4822776080128065965.post-5328971958857008786</id><published>2009-10-03T02:55:00.000-07:00</published><updated>2011-08-20T07:51:28.041-07:00</updated><title type='text'>क्रांतिकारी आतंकवादी</title><content type='html'>&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_nPm61siB87o/SscgcjUFLXI/AAAAAAAAApw/1KmAzuZmN9w/s1600-h/SHAEEDE+E+AZAM+BHAGAT+SINGH+JI.jpg"&gt;&lt;img alt="" border="0" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5388311154059980146" src="http://1.bp.blogspot.com/_nPm61siB87o/SscgcjUFLXI/AAAAAAAAApw/1KmAzuZmN9w/s400/SHAEEDE+E+AZAM+BHAGAT+SINGH+JI.jpg" style="cursor: hand; display: block; height: 341px; margin: 0px auto 10px; text-align: center; width: 400px;" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;हमारे देश में देश की आजादी के दिवानों में शहीद-ए-आजम सरदार भगतसिंह का नाम शिद्दत से लिया जाता रहा हैं । हाल ही में मैंने आजादी की लडाई लडने वाले क्रांतिकारियों को "क्रांतिकारी आतंकवादी" शब्द से संबोधित करने वाली किताब पढी । किताब में उन्हें &lt;b&gt;&lt;i&gt;क्रांतिकारी आतंकवादी&lt;/i&gt;&lt;/b&gt; शब्द से संबोधित करने के पीछे शायद हमारे देश के नीति निर्माताओं का यह तर्क हो कि हिंसा किसी भी स्वरूप में स्वीकार्य नहीं हैं । यह देश पूरी दुनिया में गांधीजी के देश के रूप में जाना जाता हैं । अब जबकि पूरी दुनिया अस्थिरता और हिंसा के दौर से गुजर रही हैं, तब गांधीजी की अहिंसावादी रणनीति और भी ज्यादा प्रासंगिक हो गई हैं । &lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;हालांकि मैं इस बात से सहमत हूँ कि गांधीजी की अहिंसावादी नीति सही और कारगर हैं, फिर भी मुझे सरदार भगतसिंह जैसे क्रांतिकारियों को आतंकवादी जैसे शब्द से संबोधित करना न्यायोचित नहीं लगता । शाब्दिक रूप में आतंकवादी का अर्थ उस इंसान से हैं जो किसी दूसरे के मन में आतंक या डर फैलाएं । लेकिन व्यवहारिक तौर पर आतंकवादी शब्द का उपयोग देश को तोडने या नुकसान पहुंचाने वाले उन असामाजिक तत्वों से लिया जाता हैं जो हिंसा का मार्ग अपनाकर आतंक फैलाते हैं । &lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;सरदार भगतसिंह एक उच्च आदर्शों वाले इंसान थे, जो मात्र २४ वर्ष की उम्र में ही अपने देश के लिये फांसी पर लटक गये । उन्होंने अपने देश की आजादी के सपने को साकार करने के लिये उग्र तरीके अपनाये । सान्डर्स की हत्या लालाजी की मृत्यु का बदला लेने के ईरादे से की गई थी । एसेम्बली में बम गिराते समय उन्होंने ईस बात का ध्यान रखा कि किसी की जानमाल का नुकसान न हो । बम गिराने के पीछे उनका उद्देश्य कोर्ट की कार्रवाही के दौरान होने वाली बहस के जरिये अपनी बात एवं मकसद लोगों तक पहुंचाना था । इसी कारण उन्होंने बम गिराने के बाद स्वयं ही अपनी गिरफ्तारी दे दी थी । &lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;इसके विपरीत अपने देश में पडौसी देश के आतंकवादी चुपके से आकर कायरतापूर्ण निर्दोष लोगों को मारकर भागने की कोशिश करते हैं । उन कायरों को भी आतंकवादी कहा जाता हैं और भगतसिंह, सुखदेव, राजगुरू, चन्द्रशेखर आजाद जैसे सिपाहियों को भी आतंकवादी कहा जाता हैं । सीमा पर जब युद्ध होता हैं तो आमने - सामने की लडाई में भी हिंसा होती हैं, उन सिपाहियों को फौजी या देश के रक्षक कहते हैं न कि आतंकवादी । &lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;भगवान श्री राम ने भी रावण और उसकी सेना का संहार किया था । क्या उन्हें भी आतंकवादी कहा जायेगा ? &lt;/div&gt;&lt;div&gt;हमारी देश की न्यायपालिका भी जघन्य अपराधों के लिये दोषियों को मौत की सजा सुनाती हैं । क्या वह न्यायोचित हैं? दुनिया के कई देशों में मौत की सजा नहीं सुनाई जाती । इसका कारण मानवाधिकार हैं । हमें भी बचपन से यही शिक्षा दी जाती हैं कि पाप से घृणा करो, पापी से नहीं । &lt;/div&gt;&lt;div&gt;अब चूंकि भारत आजाद हैं और अब किसी को अपनी बात कहने का पूर्ण अधिकार हैं । अतः अब हिंसा से अपने ही देश को क्षति होगी । शायद इसी कारण से सरकार उन क्रांतिकारियों को भी आतंकवादी क्रांतिकारी (Revolutionary Terrorist) कहकर संबोधित करती हैं । &lt;/div&gt;&lt;div&gt;आज की युवा पीढी के आदर्श फिल्मस्टार, क्रिकेटर, उद्योगपति, करोडपति ईत्यादि हैं, जबकि भगतसिंह के आदर्श कार्ल मार्क्स और लेनिन जैसे विचारक थे । उनकी विचारधारा देश की आजादी के बाद सभी को समानता का अधिकार एवं समान अवसर प्रदान करने वाली थी । &lt;/div&gt;&lt;div&gt;इसलिये हमारे देश में उन स्वतन्त्रता के सपने देखने वालों को आतंकवादी कहना न्यायोचित नहीं हैं ।&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4822776080128065965-5328971958857008786?l=dayandnights.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://dayandnights.blogspot.com/feeds/5328971958857008786/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://dayandnights.blogspot.com/2009/10/blog-post.html#comment-form' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4822776080128065965/posts/default/5328971958857008786'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4822776080128065965/posts/default/5328971958857008786'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://dayandnights.blogspot.com/2009/10/blog-post.html' title='क्रांतिकारी आतंकवादी'/><author><name>Surendra</name><uri>http://www.blogger.com/profile/01448311128190551263</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://4.bp.blogspot.com/_nPm61siB87o/SnaAR7pAJjI/AAAAAAAAASY/0EvE4Yq3n3U/S220/my.JPG'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_nPm61siB87o/SscgcjUFLXI/AAAAAAAAApw/1KmAzuZmN9w/s72-c/SHAEEDE+E+AZAM+BHAGAT+SINGH+JI.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4822776080128065965.post-4685013117246961813</id><published>2009-09-11T03:37:00.000-07:00</published><updated>2009-09-11T04:46:44.907-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='EVENING'/><title type='text'>कोई सपनों के दीप जलाये...</title><content type='html'>&lt;span style="color:#000099;"&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;फिल्म आनंद में एक गुलजार का लिखा गीत हैं. कहीं दूर जब दिन ढल जाये, सांझ की दुल्हन बदन चुरायें, चुपके से आये, मेरे खयालों के आंगन में कोई सपनों के दीप जलायें । &lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;strong&gt;सांझ हर रोज होती हैं, सुबह भी होती हैं । सांझ और सुरज को देखने का सबका अपना नजरिया हैं । दोनों में अंतर हैं तो बस इतना कि सुबह उजाले की ओर जाती हैं और सांझ अंधेरे की ओर । मगर दोनों में सुरज की वो तपिश नहीं होती । सुबह और सांझ को हम सुरज को नंगी आंखों से सहजता से देख पाते हैं । हालांकि विज्ञान कहता हैं कि सुरज अपने वक्त के ७ मिनट बाद उगता और ७ मिनट पहले अस्त हो जाता हैं । पर विज्ञान से परे मानव अपने स्वभाव के अनुसार दिन उगने व अस्त होने का अनुभव करते हैं । कई लोग सांझ को उदासी का प्रतीक मानते हैं तो कई लोग मस्ती के आरंभ बिन्दु की तरह अनुभव करते हैं । जब भारत में कृषि की प्रधानता थी तब सांझ को कृषक अपने ढोर लेकर घर की ओर लौटते थे, जिससे पगडंडियों पर धूल उडती थी । इसी कारण संध्या को गोधूली बेला aभी कहा जाता हैं । अब गोधूली बेला तो आती हैं पर धूल नहीं उडती । &lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;strong&gt;सुबह व सांझ में एक मूलभूत अन्तर और भी हैं सूर्योदय के वक्त सुरज पूरब में दिखता हैं जबकि सूर्यास्त के समय पश्चिम में अस्त होता हैं ।&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;strong&gt;सांझ ढलने के साथ दीप जलाने का सिलसिला शुरू हो जाता हैं । शायद इसीलिये गुलजार साहब ने कहां हैं कि -कोई सपनों के दीप जलायें । दीप जलने के साथ ही एक सीमित दायरे में प्रकाश हो जाता हैं लेकिन उस दायरे के बाहर अनन्त अंधेरे में कुदरत ने जाने क्या छुपा रखा हैं, यह हम अभी तक पूरी तरह से समझ नहीं पाये हैं । किसी दिन शायद वो अंधियारा भी छंट जाये । लेकिन हम सुबह और सांझ का इन्तजार हर दिन करते हैं और करते रहेंगे ।&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style="color:#ffff66;"&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size:130%;color:#ffff66;"&gt;&lt;strong&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4822776080128065965-4685013117246961813?l=dayandnights.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://dayandnights.blogspot.com/feeds/4685013117246961813/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://dayandnights.blogspot.com/2009/09/blog-post_11.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4822776080128065965/posts/default/4685013117246961813'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4822776080128065965/posts/default/4685013117246961813'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://dayandnights.blogspot.com/2009/09/blog-post_11.html' title='कोई सपनों के दीप जलाये...'/><author><name>Surendra</name><uri>http://www.blogger.com/profile/01448311128190551263</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://4.bp.blogspot.com/_nPm61siB87o/SnaAR7pAJjI/AAAAAAAAASY/0EvE4Yq3n3U/S220/my.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-4822776080128065965.post-8934721164462027569</id><published>2009-09-11T01:46:00.000-07:00</published><updated>2009-09-11T02:41:00.506-07:00</updated><title type='text'>देशसेवक</title><content type='html'>&lt;span style="color:#660000;"&gt;देश बढ रहा हैं । हमारे देश में करोडपतियों की संख्या बढ रही हैं । वैसे हमारी जनसंख्या भी तो सौ करोड को पार कर चुकी हैं । हमारे देश का काला धन भी हजारों लाखों करोडों में हैं । हमारे देश में देशसेवकों की संख्या भी बढ रही हैं । चिंता की बात नहीं हैं । गरीबी, भूखमरी, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, महंगाई, प्रदूषण ईत्यादि समस्याएं भी बढ रही हैं । &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#660000;"&gt;मैं देशसेवकों की बात कर रहा था । हमारे देश में जब भी चुनाव आते हैं, चाहे वो लोकसभा हो, विधानसभा हो या स्थानीय निकाय चुनाव, प्रत्याशी वोट मांगते वक्त कहते हैं कि हम देश की सेवा करना चाहते हैं, आपकी सेवा करना चाहते हैं । इसी तरह जब भी किसी प्रशासनिक सेवा की भर्ती का साक्षात्कार लिया जाता हैं और प्रतियोगी से पूछा जाता हैं कि आप इस सेवा में क्यूं जाना चाहते हैं तो जवाब हमेशा एक ही मिलता हैं "मैं देश की सेवा करना चाहता हूँ " । &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#660000;"&gt;अब सवाल यह उठता हैं कि जब इतने लोग देश की सच्चे दिल से सेवा करना चाहते हैं तो यह देश तरक्की करने में इतना समय क्यूं लगा रहा हैं. इसका अर्थ यह हैं कि यहां के लोग निठल्ले हैं । बेचारे जनप्रतिनिधि और अधिकारी सेवा करते करते थक गये, लोग हैं कि सेवा करवाते हुए नहीं थके । जापान और कोरिया जैसे देशों के लोग देश के लिये काम करते हैं और अपने देश में देशसेवक लोगों के लिये काम करते हैं और लोग सेवा करवाकर उन्हें पूण्य कमाने का मौका देते हैं । &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#660000;"&gt;गीता में कृष्ण ने कहा था - यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत, अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानम सृजाम्यहम् । अब यहां के अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने देशसेवा करके इतना पुण्य कमाया हैं कि देश में धर्म की ग्लानि नहीं हो रही हैं और यही कारण हैं कि कृष्ण को अवतार लेने की आवश्यकता नहीं पडी । &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#660000;"&gt;हमारे देश में लखपति बी.पी.एल.(गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले) भी हैं । गोयाकि उनके लिये गरीबी की रेखा को कद से ऊंचा उठा लिया जाता हैं । लोग बैंक से कर्ज लेकर चुकाना भूल जाते हैं । बैंक के अधिकारी बेजा ही उनके पीछे कागज खराब करते हैं क्योंकि जब हनुमानजी जो हमारे भगवान हैं, वे भी भूलने की बीमारी से पीडित थे, तो आम आदमी की औकात ही क्या । कुछ लोगों के घर, कारखानों और कुंओं पर बिजली के तार मीटर के बिना ही जोड दिये जाते हैं । इसमें भी कसूर विद्युत विभाग का हैं । अरे भला इतनी औपचारिकताओं को पूर्ण करने में कोई अपना कीमती समय क्यूं खराब करें । जब अपने सामने खम्बा हैं तो दो तार जोडने में कितना समय लगता हैं । बचा हुआ समय सास बहू के सीरियल देखने के काम आ जाता हैं । वैसे भी औपचारिक कनेक्शन के बाद बिल भरने की कतार में खडे रहना, लाईन खराब होने पर लाईनमेन के चक्कर लगाना, उसकी जेब गरम करना ईत्यादि झंझटों से मुक्ति मिल जाती हैं । &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#660000;"&gt;चलिये हमारा देश के लोग देश को जैसे तैसे चला लेते हैं वरना इतना बडा देश चलाने की जुर्रत कोई अमेरिका भी नहीं कर सकता । वैसे अमेरिका भी कोई देश हैं जहां सडक पर थूकना भी मना हैं । अरे भई आजादी मिलने का कोई तो मतलब होना चाहिये । वरना अपने देश की धरती पर थूकने पर भी जुर्माना भरना पडे, ये कहां का इंसाफ । मुझे कोई कितना भी कहे मैं ये देश छोडकर जाने वाला नहीं, मुझे यहां के जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से सेवा करवाने का अवसर मिल रहा हैं, ऐसा अवसर कहीं और नहीं ।. &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#660000;"&gt;जय हिन्द !&lt;/span&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/4822776080128065965-8934721164462027569?l=dayandnights.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://dayandnights.blogspot.com/feeds/8934721164462027569/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://dayandnights.blogspot.com/2009/09/blog-post.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4822776080128065965/posts/default/8934721164462027569'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/4822776080128065965/posts/default/8934721164462027569'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://dayandnights.blogspot.com/2009/09/blog-post.html' title='देशसेवक'/><author><name>Surendra</name><uri>http://www.blogger.com/profile/01448311128190551263</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://4.bp.blogspot.com/_nPm61siB87o/SnaAR7pAJjI/AAAAAAAAASY/0EvE4Yq3n3U/S220/my.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry></feed>
